Sukhmani Hindi Translation Ashtapadee 1
SUKHMANI
(GURUMUKHI, NAGARI) HINDI TRANSLATION
Transliteration and attempted Translation by SANTOKH SINGH AHUJA
|
ਗਉੜੀ ਸੁਖਮਨੀ ਮਃ ੫ ॥ गउड़ी सुखमनी मः ५ ॥
राग—गउड़ी,
शीर्षक---सुखमनी, रचना---पंचम नानक गुरु अर्जुन देव
ਸਲੋਕੁ ॥ सलोकु
॥ श्लोक (छंद का प्रकार)
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ एक
निराकर परमात्मा गुरु कृपा द्वारा
ਆਦਿ ਗੁਰਏ ਨਮਹ ॥ आदि गुरए नमह ॥
आदि गुरु नानक देव को नमन
ਜੁਗਾਦਿ ਗੁਰਏ ਨਮਹ ॥ जुगादि गुरए नमह ॥
द्वितीय गुरु अंगद देव को नमन
ਸਤਿਗੁਰਏ ਨਮਹ ॥ सतिगुरए नमह ॥ सद्गुरु
अमर दास को नमन
ਸ੍ਰੀ ਗੁਰਦੇਵਏ ਨਮਹ ॥੧॥ स्री गुरदेवए नमह ॥१॥
गुरुदेव राम दास को नमन
ਅਸਟਪਦੀ ॥ असटपदी
॥ अष्टपदी (आठ
पदो का समूह)
ਸਿਮਰਉ ਸਿਮਰਿ ਸਿਮਰਿ ਸੁਖੁ ਪਾਵਉ ॥ सिमरउ सिमरि सिमरि सुखु पावउ ॥
नाम स्मरण से सुख की प्राप्ति करता हूँ
ਕਲਿ ਕਲੇਸ ਤਨ ਮਾਹਿ ਮਿਟਾਵਉ ॥ कलि कलेस तन माहि मिटावउ ॥
तन
और मन के रोग दूर करता हूँ
ਸਿਮਰਉ ਜਾਸੁ ਬਿਸੁੰਭਰ ਏਕੈ ॥ सिमरउ जासु बिसु्मभर एकै ॥
उस
जगत के पालनहार-विश्वम्भर-का स्मरण करता हूँ
ਨਾਮੁ ਜਪਤ ਅਗਨਤ ਅਨੇਕੈ ॥ नामु जपत अगनत अनेकै ॥
जिस
का स्मरण अगण्य –निर्जीव-सजीव - अनेक प्रकार से करते हैं
ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ਸਿੰਮ੍ਰਿਤਿ ਸੁਧਾਖ੍ਯਰ ॥ बेद पुरान सिम्रिति सुधाख्यर ॥
वेद
पुराण स्मृतियाँ व अन्य अनेक अमृतमयी धार्मिक ग्रंथ
ਕੀਨੇ ਰਾਮ ਨਾਮ ਇਕ ਆਖ੍ਯਰ ॥ कीने राम नाम इक आख्यर ॥
निराकार प्रभु के एक शबद
(नाम) की सत्ता से रचित हुए
ਕਿਨਕਾ ਏਕ ਜਿਸੁ ਜੀਅ ਬਸਾਵੈ ॥ किनका एक जिसु जीअ बसावै ॥
नाम का एक
कण जिस के ह्रदय में प्रवेश करता है
ਤਾ ਕੀ ਮਹਿਮਾ ਗਨੀ ਨ ਆਵੈ ॥ ता की महिमा गनी न आवै ॥
उस
की महिमा अनंत है
ਕਾਂਖੀ ਏਕੈ ਦਰਸ ਤੁਹਾਰੋ ॥ कांखी एकै दरस तुहारो ॥
हे
प्रभु ! जो केवल तुम्हारे दर्शनाभिलाषी हैं
ਨਾਨਕ ਉਨ ਸੰਗਿ ਮੋਹਿ ਉਧਾਰੋ ॥੧॥ नानक उन संगि मोहि उधारो ॥१॥
मुझे
(पंचम) नानक को उन की संगति दे कर मेरा उद्धार करो
ਸੁਖਮਨੀ ਸੁਖ ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਪ੍ਰਭ ਨਾਮੁ ॥ सुखमनी सुख अम्रित प्रभ
नामु ॥
प्रभु-नाम
शिरोमणि सुखदाता व अमृतमयी है
ਭਗਤ ਜਨਾ ਕੈ ਮਨਿ ਬਿਸ੍ਰਾਮ ॥ ਰਹਾਉ ॥ भगत जना कै मनि बिस्राम ॥ रहाउ ॥
भक्तो के हृदय में निवास करता हैं ॥ स्थायी ॥
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਗਰਭਿ ਨ ਬਸੈ ॥ प्रभ कै सिमरनि गरभि न बसै ॥
प्रभु
स्मरण के प्रताप से गर्भ में प्रवेश नहीं होता
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਦੂਖੁ ਜਮੁ ਨਸੈ ॥ प्रभ कै सिमरनि दूखु जमु नसै ॥
प्रभु
स्मरण से यम का कष्ट दूर होता है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਕਾਲੁ ਪਰਹਰੈ ॥ प्रभ कै सिमरनि कालु परहरै ॥
प्रभु
स्मरण से मृत्यु का भय दूर होता है.
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਦੁਸਮਨੁ ਟਰੈ ॥ प्रभ कै सिमरनि दुसमनु टरै ॥
प्रभु स्मरण से शत्रु नाश होते हैं
ਪ੍ਰਭ ਸਿਮਰਤ ਕਛੁ ਬਿਘਨੁ ਨ ਲਾਗੈ ॥ प्रभ सिमरत कछु बिघनु न लागै ॥
प्रभु
स्मरण से विघ्न दूर होते हैं
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਅਨਦਿਨੁ ਜਾਗੈ ॥ प्रभ कै सिमरनि अनदिनु जागै ॥
प्रभुके
स्मरण से सदैव जागृत अवस्था प्राप्त
होती है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਭਉ ਨ ਬਿਆਪੈ ॥ प्रभ कै सिमरनि भउ न बिआपै ॥
प्रभु स्मरण से भय व्याप्त नहीं होता
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਦੁਖੁ ਨ ਸੰਤਾਪੈ ॥ प्रभ कै सिमरनि दुखु न संतापै ॥
प्रभु
स्मरण से दुःख संतप्त नहीं करता
ਪ੍ਰਭ ਕਾ ਸਿਮਰਨੁ ਸਾਧ ਕੈ ਸੰਗਿ ॥ प्रभ का सिमरनु साध कै संगि ॥
(परंतु)
प्रभु स्मरण साधु संगति द्वारा प्राप्त
होता है
ਸਰਬ ਨਿਧਾਨ ਨਾਨਕ ਹਰਿ ਰੰਗਿ ॥੨॥ सरब निधान नानक हरि रंगि ॥२॥
हरि
के प्रेम में लीन होने से सब निधियां -सांसारिक सुख -प्राप्त होती हैं.
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਰਿਧਿ ਸਿਧਿ ਨਉ ਨਿਧਿ ॥ प्रभ कै सिमरनि रिधि सिधि नउ निधि ॥
प्रभु
स्मरण से रिद्धि सिद्धि (परा भौतिक शक्तियां ) व नव निधि (नौ प्रकार के खज़ाने)
मिलती हैं
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਗਿਆਨੁ ਧਿਆਨੁ ਤਤੁ ਬੁਧਿ ॥ प्रभ कै सिमरनि गिआनु धिआनु ततु बुधि ॥
प्रभु
स्मरण से ज्ञान ध्यान व निर्मल बुद्धि मिलती है.
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਜਪ ਤਪ ਪੂਜਾ ॥ प्रभ कै सिमरनि जप तप पूजा ॥
प्रभु का स्मरण
ही वास्त्विक जप तप व
पूजा है.
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਬਿਨਸੈ ਦੂਜਾ ॥ प्रभ कै सिमरनि बिनसै दूजा ॥
प्रभु
स्मरण से द्वैत भाव (प्रभुके अतिरिक्त किसी अन्य शक्ति में आस्था) मिट जाता है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਤੀਰਥ ਇਸਨਾਨੀ ॥ प्रभ कै सिमरनि तीरथ इसनानी ॥
प्रभु
का स्मरण ही तीर्थो का स्नान है.
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਦਰਗਹ ਮਾਨੀ ॥ प्रभ कै सिमरनि दरगह मानी ॥
प्रभु
स्मरण से उस के दरबार में सम्मान प्राप्त होता है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਹੋਇ ਸੁ ਭਲਾ ॥ प्रभ कै सिमरनि होइ सु भला ॥
प्रभु स्मरण से यश की
प्राप्ति होती है.
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਸੁਫਲ ਫਲਾ ॥ प्रभ कै सिमरनि सुफल फला ॥
प्रभु
के स्मरण से शुभ फल प्राप्त होते है
ਸੇ ਸਿਮਰਹਿ ਜਿਨ ਆਪਿ ਸਿਮਰਾਏ ॥ से सिमरहि जिन आपि सिमराए ॥
परन्तु स्मरण
वही कर सकता है जो उस की कृपा का पात्र होता है
ਨਾਨਕ ਤਾ ਕੈ ਲਾਗਉ ਪਾਏ ॥੩॥ नानक ता कै लागउ पाए ॥३॥
मैं नानक प्रभु-भक्तो के चरण स्पर्श करता हूँ.
ਪ੍ਰਭ ਕਾ ਸਿਮਰਨੁ ਸਭ ਤੇ ਊਚਾ ॥ प्रभ का सिमरनु सभ ते ऊचा ॥
प्रभु का स्मरण सर्वोच्च है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਉਧਰੇ ਮੂਚਾ ॥ प्रभ कै सिमरनि उधरे मूचा ॥
प्रभु का स्मरण सर्व कल्याणक है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਤ੍ਰਿਸਨਾ ਬੁਝੈ ॥ प्रभ कै सिमरनि त्रिसना बुझै ॥
प्रभुस्मरण से तृष्णा शांत होती है.
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਸਭੁ ਕਿਛੁ ਸੁਝੈ ॥ प्रभ कै सिमरनि सभु किछु सुझै ॥
प्रभु
स्मरण से सर्व ज्ञान की प्राप्ति होती है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਨਾਹੀ ਜਮ ਤ੍ਰਾਸਾ ॥ प्रभ कै सिमरनि नाही जम त्रासा ॥
प्रभुस्मरण
से यम का भय नहीं होता.
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਪੂਰਨ ਆਸਾ ॥ प्रभ कै सिमरनि पूरन आसा ॥
प्रभु
स्मरण सर्व आशा पूरक है.
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਮਨ ਕੀ ਮਲੁ ਜਾਇ ॥ प्रभ कै सिमरनि मन की मलु जाइ ॥
प्रभु
स्मरण से मन के दुश्विचार दूर हो जाते है.
ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਨਾਮੁ ਰਿਦ ਮਾਹਿ ਸਮਾਇ ॥ अम्रित नामु रिद माहि समाइ ॥
(जब ) प्रभु
-नाम रूपी अमृत ह्रदय में प्रवेश करता है
ਪ੍ਰਭ ਜੀ ਬਸਹਿ ਸਾਧ ਕੀ ਰਸਨਾ ॥ प्रभ जी बसहि साध की रसना ॥
साधु की
जिह्वा पर प्रभु निवास करते है.
ਨਾਨਕ ਜਨ ਕਾ ਦਾਸਨਿ ਦਸਨਾ ॥੪॥ नानक जन का दासनि दसना ॥४॥
(अतः)नानक
ऐसे साधु के दासो का दास
है.
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸੇ ਧਨਵੰਤੇ ॥ प्रभ कउ सिमरहि से धनवंते ॥
प्रभु
भक्त ही असली धनवान है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸੇ ਪਤਿਵੰਤੇ ॥ प्रभ कउ सिमरहि से पतिवंते ॥
प्रभु
भक्त ही गणमान्य है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸੇ ਜਨ ਪਰਵਾਨ ॥ प्रभ कउ सिमरहि से जन परवान ॥
प्रभु
भक्त प्रभु के दरबार में स्वीकार किये
जाते है.
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸੇ ਪੁਰਖ ਪ੍ਰਧਾਨ ॥ प्रभ कउ सिमरहि से पुरख प्रधान ॥
प्रभु
भक्त ही वास्तव में प्रधान पुरुष है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸਿ ਬੇਮੁਹਤਾਜੇ ॥ प्रभ कउ सिमरहि सि बेमुहताजे ॥
प्रभु
भक्त किसी और का आश्रय नहीं लेते.
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸਿ ਸਰਬ ਕੇ ਰਾਜੇ ॥ प्रभ कउ सिमरहि सि सरब के राजे ॥
प्रभुभक्त राजाधिराज
है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸੇ ਸੁਖਵਾਸੀ ॥ प्रभ कउ सिमरहि से सुखवासी ॥
प्रभु
भक्त ही वास्तव में सुखी है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸਦਾ ਅਬਿਨਾਸੀ ॥ प्रभ कउ सिमरहि सदा अबिनासी ॥
प्रभुभक्त
का कभी
नाश नहीं होता
ਸਿਮਰਨ ਤੇ ਲਾਗੇ ਜਿਨ ਆਪਿ ਦਇਆਲਾ ॥ सिमरन ते लागे जिन आपि दयाला ॥
परंतु
प्रभु का स्मरण प्रभु की दया बिना सम्भव नहीं है
ਨਾਨਕ ਜਨ ਕੀ ਮੰਗੈ ਰਵਾਲਾ ॥੫॥ नानक जन की मंगै रवाला ॥५॥
नानक प्रभु भक्तो की चरण धूरि का
अभिलाषी है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸੇ ਪਰਉਪਕਾਰੀ ॥ प्रभ कउ सिमरहि से परउपकारी ॥
प्रभु
भक्त परोपकारी होते है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਤਿਨ ਸਦ ਬਲਿਹਾਰੀ ॥ प्रभ कउ सिमरहि तिन सद बलिहारी ॥
प्रभु भक्तो पर बलिहार जाये
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਸੇ ਮੁਖ ਸੁਹਾਵੇ ॥ प्रभ कउ सिमरहि से मुख सुहावे ॥
प्रभु
भक्तों के मुख सुंदर है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਤਿਨ ਸੂਖਿ ਬਿਹਾਵੈ ॥ प्रभ कउ सिमरहि तिन सूखि बिहावै ॥
प्रभु
भक्त सदा सुखी है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਤਿਨ ਆਤਮੁ ਜੀਤਾ ॥ प्रभ कउ सिमरहि तिन आतमु जीता ॥
प्रभु
भक्त आत्मजयी है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਤਿਨ ਨਿਰਮਲ ਰੀਤਾ ॥ प्रभ कउ सिमरहि तिन निरमल रीता ॥
प्रभु
भक्तो के सब कार्य कलाप निर्मल है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਤਿਨ ਅਨਦ ਘਨੇਰੇ ॥ प्रभ कउ सिमरहि तिन अनद घनेरे ॥
प्रभुभक्त सदा आनंदित
है
ਪ੍ਰਭ ਕਉ ਸਿਮਰਹਿ ਬਸਹਿ ਹਰਿ ਨੇਰੇ ॥ प्रभ कउ सिमरहि बसहि हरि नेरे ॥
प्रभुभक्त
प्रभु के निकट वर्ती है
ਸੰਤ ਕ੍ਰਿਪਾ ਤੇ ਅਨਦਿਨੁ ਜਾਗਿ ॥ संत क्रिपा ते अनदिनु जागि ॥
ऐसे संतो की
क्रिपा से सदैव जागृत अवस्था मिलती है
ਨਾਨਕ ਸਿਮਰਨੁ ਪੂਰੈ ਭਾਗਿ ॥੬॥ नानक सिमरनु पूरै भागि ॥६॥
परंतु
हे नानक! प्रभु का स्मरण पूर्ण
भाग्योदय से ही मिलता है।
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਕਾਰਜ ਪੂਰੇ ॥ प्रभ कै सिमरनि कारज पूरे ॥
प्रभु
स्मरण से सभी कार्य सम्पन्न होते है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਕਬਹੁ ਨ ਝੂਰੇ ॥ प्रभ कै सिमरनि कबहु न झूरे ॥
प्रभु भक्त कभी
निराश नहीं होते
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਹਰਿ ਗੁਨ ਬਾਨੀ ॥ प्रभ कै सिमरनि हरि गुन बानी ॥
प्रभु
भक्त हरि के गुणो का गायन
करते है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਸਹਜਿ ਸਮਾਨੀ ॥ प्रभ कै सिमरनि सहजि समानी ॥
पभु
स्मरण से सहज ( स्थित प्रज्ञ ) अवस्था प्राप्त होती है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਨਿਹਚਲ ਆਸਨੁ ॥ प्रभ कै सिमरनि निहचल आसनु ॥
प्रभु
स्मरण से निश्चल समाधि प्राप्त होती है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਕਮਲ ਬਿਗਾਸਨੁ ॥ प्रभ कै सिमरनि कमल बिगासनु ॥
प्रभु
स्मरण से ह्रद्य कमल विकसित होता है
ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਸਿਮਰਨਿ ਅਨਹਦ ਝੁਨਕਾਰ ॥ प्रभ कै सिमरनि अनहद झुनकार ॥
प्रभु
स्मरण से अनाहत नाद का ज्ञान होता है
ਸੁਖੁ ਪ੍ਰਭ ਸਿਮਰਨ ਕਾ ਅੰਤੁ ਨ ਪਾਰ ॥ सुखु प्रभ सिमरन का अंतु न पार ॥
प्रभु
स्मरण से अपार सुख प्राप्त होता है
ਸਿਮਰਹਿ ਸੇ ਜਨ ਜਿਨ ਕਉ ਪ੍ਰਭ ਮਇਆ ॥ सिमरहि से जन जिन कउ प्रभ मया ॥
परंतु
स्मरण वही है जिन पर प्रभु की कृपा होती है
ਨਾਨਕ ਤਿਨ ਜਨ ਸਰਨੀ ਪਇਆ ॥੭॥ नानक तिन जन सरनी पया ॥७॥
नानक
ऐसे प्रभु भक्तो का शरणागत है
ਹਰਿ ਸਿਮਰਨੁ ਕਰਿ ਭਗਤ ਪ੍ਰਗਟਾਏ ॥ हरि सिमरनु करि भगत प्रगटाए ॥
हरि
स्मरण से ही हरि भक्त प्रकट हुये है
ਹਰਿ ਸਿਮਰਨਿ ਲਗਿ ਬੇਦ ਉਪਾਏ ॥ हरि सिमरनि लगि बेद उपाए ॥
हरि
स्मरण में रत होकर वेदो की रचना हुई
ਹਰਿ ਸਿਮਰਨਿ ਭਏ ਸਿਧ ਜਤੀ ਦਾਤੇ ॥ हरि सिमरनि भए सिध जती दाते ॥
हरि
स्मरण से ही सिद्ध यति और दानी हुए
ਹਰਿ ਸਿਮਰਨਿ ਨੀਚ ਚਹੁ ਕੁੰਟ ਜਾਤੇ ॥ हरि सिमरनि नीच चहु कुंट जाते ॥
हरि
स्मरण से निम्न वर्गीय भी चारो दिशाओ
में चर्चित हुए.
ਹਰਿ ਸਿਮਰਨਿ ਧਾਰੀ ਸਭ ਧਰਨਾ ॥ हरि सिमरनि धारी सभ धरना ॥
हरि स्मरण सब का आधार है
ਸਿਮਰਿ ਸਿਮਰਿ ਹਰਿ ਕਾਰਨ ਕਰਨਾ ॥ सिमरि सिमरि हरि कारन करना ॥
हरि स्मरण
ही सर्व कार्यो का कारक है
ਹਰਿ ਸਿਮਰਨਿ ਕੀਓ ਸਗਲ ਅਕਾਰਾ ॥ हरि सिमरनि कीओ सगल अकारा ॥
हरि स्मरण (नाम) से सब सृजन हुआ
ਹਰਿ ਸਿਮਰਨ ਮਹਿ ਆਪਿ ਨਿਰੰਕਾਰਾ ॥ हरि सिमरन महि आपि निरंकारा ॥
हरि
स्मरण में निराकार प्रभु स्वयम् निवास करते है.
ਕਰਿ ਕਿਰਪਾ ਜਿਸੁ ਆਪਿ ਬੁਝਾਇਆ ॥ करि किरपा जिसु आपि बुझाया ॥
परंतु
प्रभु अपनी कृपा द्वारा जिसे स्वयम् ज्ञान देते है
ਨਾਨਕ ਗੁਰਮੁਖਿ ਹਰਿ ਸਿਮਰਨੁ ਤਿਨਿ ਪਾਇਆ ॥੮॥੧॥ नानक गुरमुखि हरि सिमरनु तिनि पाया ॥८॥१॥
हे
नानक ! वही हरि स्मरण को प्राप्त करता है.
प्रथम अष्टपदी समाप्त !
|
Comments
Post a Comment