New India?
नगरों का नाम बदलने की भक्तों ने प्रथा चलाई जिसे देख त्योहारों ने भी अपनी व्यथा सुनाई दीवाली बोली , अली से कब मुझ को मुक्ति दिलवाओ गे दीपावली से वली शब्द का कब कलंक मिटाओ गे होली बोली, मेरा ली भी चीन के जैसा लगता है दशहरा का हरा हमें नापाक की साजिश लगता है हम त्योहारों का, संघी जी कब सम्मान लौटाओ गे नाम बदल कर आप हमारे अच्छे दिन कब लाओगे विनती करते है हम मिल कर, थोड़ा सा उपकार करो दीन दयाल और अटल नाम से अपना भी श्रृंगार करो होली जब अपने नए नाम से अटलोलिका कहलाएगी दीवाली दीनदयाली बन निज भाग्य पर इतराए गी दशभगवा पर रावण की प्रतिमा जब फूंकी जाए गी नव भारत की भव्य कल्पना स्वत : साकार हो जाये गी|